जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी के लिखल भोजपुरी गीत देवता

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नाहीं उठेला जिनिगिया के भार देवता ।
जोरिहा हमसे पिरितिया के तार देवता ॥

नइहर छूटल, छूटल सासु के दुवारिया
कतहूँ न इंजोर लउके सगरों अन्हरिया
बाझल जिनगी जगतिया मझार देवता ॥

बोझिल रिसता आ बोझिल परिवार हो
देखि देखि पिराला ई हियरा हमार हो
ना जाने कहवाँ बिलाइल बहार देवता ॥

मनई न देखे मनई, मनई ना सुनेला
आपन आपन करे, बस आपन गुनेला
तोहीं भरि आँखि लीहा निहार देवता ॥

बाचल न गाँव आपन नाही बचल देशवा
अझुराइल हित मीत मिलल ना सनेसवा
सझुरहिया सभके आ लीहा सँभार देवता ॥

-जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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