तैयब हुसैन पीड़ित जी के लिखल भोजपुरी कविता संग्रह अनसोहातो

अनसोहातो शब्द के ‘अ’ से साइत हिंदी के अकविता भा अंग्रेज़ी के नास्टेल्जिया के बोध होय, एह से जरूरी लागता की अइसन भाव के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में परिखल जाव।

आजादी के बाद प्रगतिशील आंदोलन के सबसे बड़ त्रासदी ई रहल की ओकरा से जुड़ल रचनाकार त सत्ता के छदम आ जन विरोधी चरित्र के उजागर करे में लागल रहलन बाकि उनकर राजनितिक नेतृत्व भारतीय शासक वर्ग का साथे आपन गोटी बइठावे के सुगम राह धइलक। ई आम जनता साथे धोखधड़ी रहे, क्रांति के शार्ट-कट रास्ता के तलाश।

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साठ के बाद मोहभंग का स्थिति में कविता में विद्रोही स्वर उभरल जवना में किसान-मजूर आवे लगलन, लोकभाषाअन के आहट कथित शिष्टों साहित्य में सुनाये लागल।

असल में दोसरका ओद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया के हालत बदल गइल। जिनिगी के समीकरण पहिले से जादे दुरूह आ जटिल भइल। एही घरी कविता से गीतात्मक तत्व दुनिया भर में बाहर होय लगलनसअ। एकर कारण ई रहे की आदमी के दुख-दरद आ कठिनाई अब गीतन के अँजुरी में आटें के सान के ना रहल गइल रहे। सुभावतः अभिव्यक्ति के दायरा बढ़े लागल।

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Bhojpuri poem collection Ansohato by Taiyab Hussain Peedit.

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