अनका के पाँडे दिन देले अपने चलेले भदरा में

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दोसरा के उपदेस देबे के बेर सभे शिष्ट बन जला, बाकिर अपना बेर सभ शिष्टता भुला जाला। “परोपदेशे बेलायम्: शिष्टता सर्वे भवन्ति ते विस्मरन्तिह शिष्ट्व स्व्कर्य समुपस्थिते”

भदरा मे कउनो सुभ काम ना कइल जाला, जइसन की पंडित लोग बतावेला। बाकिर ई उपदेश दोसरखातिर होला | ज़रूरत परला पर अपने बतावल नियम अपना लोग तूर देला। एसे कहल जाला उपदेश दोसरखातिर सहज होला, बाकिर अपना खातिर कठिन।

दोसरा के उपदेश दिहल बड़ा आसान होला।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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