दरद मोहब्बत के

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करब इयाद रखिहा , सबर इयाद रखिहा
मोहब्बत के कवनो ना घर इयाद रखिहा
कहा से चली ई कहाँ तक ले जाइ
एकर ना बा कवनो शहर इयाद रखिहा

बेमारी ई बड़ बा न कवनो दवाई
ई दरिया गहिर बा दी सबके डुबाई
जे सम्हरल ना ओकर बिखर जाइ जिनगी
सुनामी ई बनि के दी सबके बहाई
बना दी ई जिनगी जहर इयाद रखिहा
मोहब्बत के कवनो ना घर इयाद रखिहा

लुटल बाड़े चक्कर में घर जेतना
लहू बह गइल बड़े धरती प केतना
कई हीर राँझा दफन बाटे
दुखवाल गइल जाने दिल एह में केतना
बा ठोकर बहुत, दर बदर इयाद रखिहा
मोहब्बत के कवनो ना घर इयाद रखिहा

जे रोगी एकर बा उहे जान पायी
मोहब्बत के दुःख त उहे सच बतायी
बा गम के अन्हरिया के चहुओर बादर
सितम एह मे सब लोग सह भी ना पाई
बहल लोर दुःख के नजर इयाद रखिहा
मोहब्बत के कवनो ना घर इयाद रखिहा

– घनश्याम प्रजापति

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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