मंदिर मे दुसाध

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प्रभास मिश्र
प्रभास मिश्र
ए धनेसरी , तनी ते अपना सोड़वा (सरफ) में से दे त। देख ना चार -पांच हाली त खूबे रगड़-रगड़ के फींच लेनी बाकिर बुशट में लागल ई केरा के दाग त छुटते नईखे। हमार सोड़वो आ आधा फाड़ा के फेना के टिकियो साफ हो गईल।
कबूतरी के बात सूनी के धनेसरी ,आपना सोड़ा के चिमीकी ,गड़हीऍं में खड़ा भईले साड़ी के फाकं में से खोल के कबूतरी कवर बढावे लगली आ बुशट कवर देखत पूछली की-ई दाग कईसे लाग गईल ह ?
काल्हुए गबरा जगदमा माई तर अस्टजाम खातिर केरा के थंब काट के बगईचा से ले आईल रहुए।ऊहे लेआवत में ई दाग लाग गईल बा ।
बाकिर कबूतरी,गबरा के लेआवल केरा के थंब के त अस्टजाम में लगईबे ना करीं लोग। पंड़ी जी लोग त दुसाध लोग के मंदिर पर जाहुॅं नईखे देत लोग त फेर तोरा लईका के लेआवल केरा के थंब के ऊ लोग पूजा में कईसे लगाई।आ गबरा के केरा के थंब ले के जाऍं में डर ना लागल ह।ओकरा के, के कहले रहुए ओजी थंब ले जाएं के।एगो त तोर लईका बा, काहे ते ओकरो जान पर खेलतारिस । एगतीया करी त गावं के लोग ओकरा के मुअली के मार मारी।

अरे हम का करी, ऊ अब हमरा कहला रहला में बा।हम आ ओकर बाबू कह के हारि गईनीसन की ते पूजा -पाठ में आ चाहे एहुग मंदिर पर मत जईहे, बाकिर ऊ त हमनी के सुनते नईखे।ऊ कालिज में जाएं का लागल, उ त हमनी के सब बात काटे लागल बा।गावं के पंड़ी जी आ बाबूसाहेब लोगिन के लईकन के संगही गेना आ डंडा ऊबिछे आला खेल खेलेला।ओही लोग के संगे अब कालिजों जाला ।मैटिक के इम्तिहान में त ते जानते बारिस ,कि पंड़ी जी आ बाबू साहेब के लइका लोगन से ऊ आगे रहुऐ।
ई सब बात कबूतरी एके सांस में कह देहलस।
धनेसरी -पिछिला फागुन के त बात ईयादे होई तोरा, केगंतिया करीमना के बाबूसाहेब लोग अंधमरू कईले रहुवे लोग खाली एह खातिर कि ऊ बाबूसाहेब लोग के दुअरा होरी के गीत गवले रहे।

कबूतरी – का करबे हमनी के जाते एतना छोट बा कि जब जेकरा मन करेला उ जबरदस्ती काम करवा लेला,गरिया देला ,पोखरा पर नहाऍं ना देला ,मंदिर में जाए ना देला ,लगन-बिआह में खाएं के अंगया ना देला ,…!आऊरू का का कहीं।लोग कहे ला धनेसरी कि ई सब पिछिला जनम के कईल करम के दोष ह।पंड़ी जी लोग कहे ला कि एह जनम में ठीक से जेंग उ लोग कहेला करेम सन त अगिला जनम में हमनीयों के ठीक घरे जनम ले सकेनीसन ।अब त हम अपना अगिला जनम के ठीक करे खातिर ही एह जनम में जईसे पंड़ी जी लोग कहेला ओंग करेनी।

धनेसरी – अरे कबूतरी ,रातु हमार सवांग कहत रहुअन कि काल्हु सांझि के पंड़ी जी आ बाबूसाहेब लोग बैठाका कईले रहुए लोग ।ओमे मास्टर साहेब ,जर्नादन बाबा के लईका जवन अखबार में काम करे ले ,बथनिया वाला दूबे जी के भतीजा जिन वकील हऊए ,आ दामोदर बाबूसाहेब के लईका जिन हवाई जहाज चलावेले ,ऊ सभे लोग ई कहलस कि अब आगे से पोखरा में गांव के सभे लोग के चाहे उ कवनो जाति के होखे , नहाए आ गाय -गोरू के पानी पीए में कवनों रोक ना रहे के चाही।मंदिर में अब केहुओ के आवे से ना रोकल जाई चाहे उ डोम ,चमार आ दुसाध काहे ना होखे ।सभे केहु अब छठ एके घाट पर मनाई ।ई सब बात पर जब फैसला होत रहे त गावं के सरपंच साहेब आ आउरू पुरनिया लोग एहपर खूबे खिसिया के एह नया छोकरा लोगन पर गावं के माहौल खराब करें के दोष लगावत रहे।ढ़ेर देरी ले सभे लोग में बहस बड़ी हल्ला गुल्ला में होत रहे।बाकिर पुरनिया लोग ई बात माने के तैईआरे ना रहे।उ लोग त एह चारू -पांचु जाना के गांव छोड़ देबे के कहत रहुए लोग।

बाकिर जब वकील साहेब जोर से सभे के डांट के कचहरी में ई मामला ले जा के बात कहुअन तब जाके पुरनिया लोग तनी नरमाईल। तलेलेत अखबार में काम करे आला गणेश बबूआ सभे पुरनिया लोग से निहोरा कईनी की ई सब बात आजु के समय के जरूरत बावे ,अगर रऊरा लोगना मानेम त हमनई सब पोल अखबार में छाप देम । धीरे-धीरे कके सभे केहु एह बात के मान लेहलस।

धनेसरी अभी आपन बात कहते रहे कि कबूतरी के करिआ लमछूछूर मुॅंह आ छितराईल करिआ-भुअर केश के बीच में उजर बतीसी चमके लागल।आज कबूतरी के ई लागे लागल कि ओकरा हिया के टुकड़ा गबरा के अब गावं के बड़हन लोग कवनो छोट-मोट बात खातिर मुअली के मार ना मारी।
नयका पढ़ल लिखल लोग आज ना खालि अपना पुरनिया बाबा ,पापा ,चाचा लोग के सोच बदले खातिर बाकिर गावं के सभे लोग के बराबर के मान दिआवे खातिर चाहे ऊ कवनो जात होखस, आ समाज के जंग लागल पुरान परंपरा के बदले खातिर जवन करेजा देखवले बा लोग ओह के आज देश के हर गांव-गांव में जरूरत बा।समय के जरूरत आ मानवता के भलाई एही में बा कि हाली से हाली ई करानति हर गावं, मोहल्ला ले जल्दी से पहुॅंचे ।

-प्रभाष मिश्रा (आखर के फेसबुक पेज से)

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