डॉ॰ ब्रज भूषण मिश्र जी के लिखल भोजपुरी गज़ल संग्रह अचके कहा गइल

हमार अबहीं तक कवनो स्वतंत्र काव्य-संग्रह ना आइल रहल ह। सन १६८२ में दू-रंग नाम से श्री विपिन बिहारी चौधरी जी संगे संयुक्त काव्य-संकलन निकलल, जवना के दूसर-रंग में हमार अठारह गो कविता संकलित रहे। एकरा बाद घाटी की आवाज़आगे-आगे नामक काव्य संकलन में ओकर सम्पादक लोग हमार पांच-पांच गो भोजपुरी कविता प्रकाशित कइल। अब अचके कहा गइल नाम से हमार अबग पहिला काव्य संकलन ग़ज़ल विधा में रउरा सोझा बा। एह संग्रह में एकतीस गो ग़ज़ल बाड़ी स।

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अचके खा गइल के रउरा सभन का हाथ तक पहुँचावे के सारा श्रेय डॉ धीरज कुमार भट्टाचार्य जी, संचालक, कबीर भोजपुरी पुस्तकालय का बाटे। बंगला भाषा भाषी भइला बावजूद इहाँ का भोजपुरी खातिर जतना कर रहल बानी, ओतना भोजपुरियन से नइखे होत। अनुज, ‘फारुख साहबगाजवी’ के आशीर्वाद देत बानी जे हमरा गजलन के प्रकाशन में प्रेस में समय दिहलन। अइसहीं ‘अखिल’ आशीर्वाद के पात्र बाड़न।

हमार ग़ज़ल अगर ग़ज़ल के साँचा में खरा उतरत बिया, त एकर सम्पूर्ण श्रेय हिंदी में ख्यातिलब्ध गज़लगो आ ‘अनुभूतियों के देश’ आ ‘अक्स के कृतिकार’ श्री नीतीश्वर शर्मा ‘नीरज’ जी के बा।

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Achke kaha gayeel A collection of Bhojpuri ghazals written by Dr braj Bhushan Mishra.

रउवा खातिर  
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