बब्लु सिंह जी के लिखल भोजपुरी लघु कथा सौतेली माई

आई पढ़ल जाव बब्लु सिंह जी के लिखल एगो भोजपुरी लघु कथा सौतेली माई , पढ़ीं आ आपन राय बताइ कि रउवा इ भोजपुरी लघु कथा कइसन लागल, रउवा सब से निहोरा बा की पढ़ला के बाद शेयर जरूर करीं

बताई हइसे करे के चाही उनका, का भइल उनकर आपन बेटी ना रहल हिय लेकिन माई त उहे नु कहात रहली ह — फुलेसर के मेहरारू मुँह बना के कहली !

आरे ना हो देआदिन उ त शुरुवे से फूटलो आँखी ना देखे के चाहेली प्रतिमावा के ! मनोज के मेहरारू जवाब में कहली !

प्रतिमा के आज बरिआत आवे वाला रहे , दुवार पर सामियाना गिरल रहे आ कोना में एक तरफ टेन्ट गिरा के हलुवाई लो खाना बनावत रहे !
टोला मोहल्ला के लइका सभ माडो सजावत रहले सन आ जेतना हित लो आइल रहे सभे कवनो ना कवनो काम में अझुराइल रहे !

मोहल्ला के सभ मेहरारू लो प्रतिमा के घरे आइल रहे नेग करे खातिर , लेकिन जइसे पता चलल कि प्रतिमा के सौतेली माई त आपना नइहर चल गइल बाड़ी ,सभ मेहरारू लो अपने में काना फुसी करे लागल लो !!

बरिआती के भीड़ भाड़ाका के बिच जेताना टोला के मेहरारू लो रहे आपन आपन ज्ञान के अनुसार सौतेली माई पर ज्ञान बांटे लागल लो,सभ सुनत लोगवा के बतिआ तीर लेखा लागो चन्देसर (प्रतिमा के बाबूजी ) के ,दुखी मन से पियरी पहिन घर से निकल गइले !

बब्लु सिंह जी
बब्लु सिंह जी

हरेक कदम पर उनका पुरान बात कुल्ही दिमाग में दउड़त रहे ,का मुँह देखाईब हम समाज में, गुमटी पर रुक के बीड़ी खरीद पिये लगले, आ इयाद करे लगले पिछला सभ बात, कि काहे बिना कवनो कारण, बिना कवनो झगड़ा अइसे उ घर से बिना केहू के कुछु बतवले चल गइली !!

चन्देसर एगो मजूदर रहले, उनकर बिआह धूम धाम से भइल रहे, आपना जीवन साथी से बहुते खुश रहले ,हंसी ख़ुशी से दिन बीतत रहे लेकिन नियती के खेला बहुते अजीब होला , इ जीवन कब केने करवट फेरी केहू ना जाने ।

दू साल बाद पेट से रहली इनकर मेहरारू ,त केतना ख़ुशी खुशी उनकर ख्याल राखस, आखिर बाप बने वाला दिन भी आ गइल , भोरही से पेट में दरद उठल त लगही के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा देले रहले !

साँझ के समय रहे , बाजार से मिठाई खरीद लेहले कि कही रतिआ में दोकान बंद मत हो जाव , तेजी से अस्पताल चल देहले , बाप बने के खुशी इनका चेहरा से पूरा झलकत रहे , आँख के चमक बतावत रहे की इनका जिनगी के नवका बिहान होखे आला रहे।

अस्पताल पहुँचते कहीं की नर्स निकलली बाहर आ कहली :- चन्देसर आप ही है, माफ़ कीजियेगा बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है हम बच्ची की माँ को नहीं बचा पाये !

एतना सुनत कहीं की धक्क से लागल इनका ,हाथ में से मिठाई के झोरी निचे गिर गइल, घुटना पर गिर के फफक फफक रोवे लगले , भगवान के कोसे लगले की आखिर कवन पाप हम कइले रहनी की हेताना बड़हन सजा मिलल हमके !

खैर मेहरारू इनकर स्वर्ग सिधार गइल रहली आ इनका गोदी में एगो सुंदर गुड़िया छोड़ गइल रहली त प्यार से प्रतिमा नाम धराइल आ चन्देसर दिन भर ओह लईकी के गोदी में उठवले सोंच लेले रहले की जिनगी भर आपाना मेहरारू के इयाद में बिता देंम !!

हीत मीत समझावल लो की होनी के के टाल सकेला, आरे कम से कम आपाना खातिर ना त एह बबुनिया खातिर फेरु बिआह कर ल ,कबले तु ख्याल रखबअ आरे काम धाम भी त बा ।

सभके दबाव में बगल के गाँव में ही रीती रिवाज से दोसर बिआह भइल, दुसरकी मेहरारू गरीब घर के रहली आ उहो माई बाबूजी के एकही लईकी त सोंचले की कम से कम मरम बूझिहे त !!

चन्देसर के सुना जिनगी में फेर से बहार आ गइल, बहुत निमन बेवहार के मेहरारू निकलली ! आ प्रतिमा के पालन पोषण आपन लईकी लेखा करे लगली !

कुछ साल बीतल आ इनको देह से एगो लइका भइल, अब त चारु ओर खुशी ही खुशी रहे , लइका लईकी दुनू बड होखे लगले ।

आ जेतना ममता प्रतिमा पर लुटावस, ओतना आपन लइका पर भी ना, कोना में से छुप छुप के चन्देसर देखल करस, माई बेटी के दुलार ,आ सोंचस की मेहरारू के रूप में देवी मिल गइली !!

समय के चक्र घुमल दुनो लइका लईकी सेयान भइले, कहल जाला नु की दोसरा के ख़ुशी पड़ोसी के बर्दास्त ना होला ,,,,टोला मोहल्ला में जेकरे घरे प्रतिमा जास कवनो काम से मेहरारू लो मन फोड़े इनकर ।

कि बेचारी के केतना दुख बा एकर माई केतना सुंदर रहली, मर गइली इहो ना सोंचली की एकर का होइ आ देखअ त उनकर दोसरकी मेहरारू आपना लइका के केताना मानेली, एकरा के देखहु के ना चाहस ।

रोज रोज के इ मेहरारू लो के अइसन ताना छोटे से बइठ गइल प्रतिमा के मन में, आ इ ख्याल आ गइल कि इ हामार सौतेली माई हिय, आ सौतेली माई त कबो अपने लइका के जादा मानी नु ।

कुछु अढ़ावल ना करस, बात बात पर उल्टा बोल देस लेकिन एह सब के परवाह ना कर के उनकर माई ओतने प्यार आ ममता लुटावस जेताना अपना लइका के, लेकिन जब गलतफहमी दिमाग में घुस जाला त सच्चाई ना लउके।

खैर उहो दिन आ गइल, प्रतिमा के बिआह सेट भइल, तिलक जब गइल त, लइका पार्टी कइलस बवाल ! दहेज़ के पइसा में डेढ़ लाख रूपिया कम रहे, लइका के बाबूजी कहस कि जबतक पइसा ना मिली, तिलक ना चढ़ी।

कसहु गोड़ धरिया कइले चन्देसर आ एह शर्त पर तिलक चढ़ल की बरिआत के दिने पइसा मिल जाई, दू दिन पहिले रात के चन्देसर खाना ना खइले त परेशान देख के पुछली कि — काहे जी खाना काहे नइखी खात, कवनो बात बा का ? त पूरा बात बतवले रहले।

पूरा बीड़ी के बंडल खतम हो गइल लेकिन कारण ना सोंच पवले ,मन से इहे आवाज आवे के पहिलही हम इ सोंच सोंच के मुअतानी कि साँझ के कवन मुँह देखाईब, ओहिमे इ नइहर जा के परेशानी काहे बढ़ा देहली।

साँझ होवे वाला रहे, अँगना घर चहल कदमी रहे , साउंड बॉक्स वाला फ़िल्मी गीत बजावत रहे, तबले एगो लइका कहलस की बारात गांव के बाहर आ गइल बा, इ आवाज से चन्देसर खुश भइला के बजाय, काँपे लगले कि अब कवन तमाशा होइ दुवार पर ।

प्रतिमा सज धज के अपना कमरा में सखी सहेली के बिच गुम सुम बइठल रहली, कि उनका करम में ना जाने का लिखल बा, तलही दुआर पर रिक्शा रुकल आ एक हाथ के घुंघटा निकलले एगो मेहरारू घर में घुसली ।

आरे इ त चन्देसर बो हई ,अब का करे अइली ह- मुंह बना के मनोज के मेहरारू ताना मरली, ओने उ दनदनाईल कमरा में घुसली आ पीछे से चन्देसर, रूम में जाते कहीं कि खींच के एक थापड़ मरले कि आज जनाईये देहलू की सौतेली सौतेली ही होखेले, आरे अपना बेटी के ऊपरे मन से विदा कर देले रहतु।

रोवत सुसुकत नोट के गड्डी चन्देसर के हाथ में रख उनकर मेहरारू कहली :- कि ली हई पूरा डेढ़ लाख बा ,लइका आला लो के दे देंम , एकरे इंतजाम करे गइल रहनी ह,

हेताना रुपिया कहाँ से आ बता के नु जाला :- चकित विस्मित पुछले चन्देसर

रउवा जाये देती का ,बाबूजी के मुआला के बाद हामार जवन दू कठा जमीन बाँचल रहे उहे बेच देनी ह , जर जमीन त किनात रही लेकिन हामार बेटी के बिआह में कवनो तमाशा होइ त लोग का कही , भले सौतेली हई त का माई के फर्ज त निभावे के अधिकार दी।

चन्देसर फफक फफक रोवे लगले ,टोला के मेहरारू लो जे सौतेली माई के परिभाषित करत रहे ,आपन मुँह लुकवा लेहलस लो ,आ प्रतिमा दउड़त आपना माई के गले लग रोवे लगली , चारु ओर आँसू के बाढ़ आ गइल , आ आज प्रतिमा के आँसू निकलत खुद से माफ़ी माँगत रहे कि हम आपन माई के दुलार काहे ना समझ पवनी ……….।

रउवा खातिर:
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