गंवार | भोजपुरी कहानी | गणपति सिंह

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आई पढ़ल जाव गणपति सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी गंवार, रउवा सब से निहोरा बा कि पढ़ला के बाद आपन राय जरूर दीं, अगर रउवा गणपति सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी अच्छा लागल त शेयर आ लाइक जरूर करी।

एगो लईकी के बियाह ओकरा मरजी के बिना एगो सीधा साधा लइका से तय भइल, जवना के घर में ओकरा माई के छोड़ कोई ना रहे। दहेज में लइका के ढ़ेरे समान आ रोपिया मिलल।

लइकिया दोसरा से पेयार करत रहे आ हद से जादे करत रहे। शाएद लइकवो….

लइकिया के बिआह भइल आ ससुरारी आइल। रात के सेजिया पर बइठल रहली। लइकवा एक गिलास दूध लेके आइल। आवते लइकिया एगो सवाल दगलस। मरद आपना मेहरारू के मरजी के बिना हाथ लागावे तs ओहके बलातकार कहल जाई कि ओकर हक?

लइकवा कहलस कि आतना दूर तकले जन सोचs। हई दूध ले आइल बानी पी लs। हम तहरा के नीके नीक रात बितो इहे कहे आइल रहनी हवे। आतना कह के उ घर से बहरी चल गइल।

लइकिया मन मार के रही गइल। काहे से कि सोचले रहे कि कवनो बहाना से झगड़ा करब आ एह गंवार से आपन पीछे छोड़ाइईब। बाकिर ओकर ना लहल। उ दिनभर मोबाइल फोन टिप टाप करे आ घर के कवनो ना काज करे। लइकवा के माई दिनरात घर के सारकाम करस। उनका ओकरा से कवनो सिकाएत ना रहे।

लइकवा एगो कंपनी में बाबू के पद पर काम करत रहे। बहुते मेहनती आ इमानदार भी रहे। महिना लागी बियाह भइलबाकिर मरद मेहरारू एक जगे ना सुतल। लइका बाड़ा सुघड़ मिजाज के रहे आ बहुते कम बोले। खाएके बेर पुछ लेवे कि हमनी जवड़े खइबू कि आपना कमरा में….. सुते के पहिले लइकवा के डायरी लिखे एगो आदत रहे आ रोज लिखे।

गणपति सिंह जी
गणपति सिंह जी

लइकवा के दफ्तर गइला के बाद लइकिया आपन इसकुटी से बहरी घुमे चल जाव आ आपना आशिक से भेंट करे। ओकरा इस घर आ एह गंवार से दूर भागे के रहे, एह से बराबर बहाना खोजे। एकदिन बेमतलबो सास के उल्टा पुल्टा बोले लागल आ खानवा बिग देलस। एह बात पर लइकवा गुसा के लइकिया के जमके एक चटकन खींच देहलक। ओकर माई डांटे लगली आ कहली छोड़ जाएद।

ओकरा बहाना मिलल आ मुंह फूला के रोज नीयन आपना आशिक से भेंट करे गइल।

ओह लइकिया में एगो खासियत इस रहे कि उ आपना आशिक से तो बहुते प्रेम करत रहे लेकिन आपन असमत लाज इज्जत बचा के रखले रहे। आशिक का लगे पहुँचते कहलस कि हम ओह गंवार का जड़े अब एको घड़ी ना रहेम। आज हमरा के हाथ चला देले बा। आछा बात नइखे भइल। ओकर आशिक कहलस कि हमरा संगे भाग चल। हम तोरा से हरमेशा कहत रह गइनी कि भाग चल। बहुत दूर जहाँ आपन कोई ना होखे।

लइकिया कहलस कि बिआह होखे के पहिले त हम आइलेट रहनी। तूहीं नूं लउटा देहले रहल। लइकवा कहलस कि खाली हाथ कहवा ले भगतू। कुछ पईसा गहना गुड़िया लेके आइल रहतू। त तू खलिए हाथे चल अइलू। दूर देश में बिना पईसा कौड़ी के दसे दिन में पेयार के भूत उतर जाईत।

लइकिया कहलस कि तहरा हमरा बारे में घर के लोग जानत रहे एह से गहना पईसा कौड़ी हमर एटीएम सब छीन लेले रहे लोग। हम का करती। कइसे लिअइती। हमनी कहियो कमा के खा लेतीं सन।

ओकर आशिक कहलस कि चालाक आदमी सब बात पहिले सोचेला तब अपन काम करेला। हम तहरा के छुवे के चहनी त तू आपना से सटे ना देहलू आ हरमेशा कहत रह गइलू कि बियाह बाद सब होई। बहुत नखरा बा तहरा लगे।

लइकिया कहलस कि सब तहरे नूं बा। पता बा अभी ले हम कुंआरे बानी। बिआहों भइला के बाद ओह गंवार के सटे नइखी देले। का बुझत बाड़। काहे से कि हम मन से तोहरे के आपन मरद मान चुकल बानी। बस तहरा नाम के सेनूर लगावे के बाकी बा। बस ऊहो लगा दs बस ओकरा बाद तहार मरजी बा।

ओकर आशिक कहलस कि ठीक बा हम तईयार बानी। बाकिर अबकिर कुछो रूपिया गहना लेके अइह। ई मत सोचीह जे कि हम दउलत से पेयार करीला। हम त तहरा से नेह लगते बानी। रूपिया रही त छोट मोट धंधा कइल जाई।

लइकिया कहलस कि ओह गंवार के लगे का बा। हमरा बाप के देहल ३लाख रोपेया आ मारूति कार बा। ऊहे लेके आइब।जगह के तय हो गइल कि फलना जगे भेंट होई। लइकिया चुपचाप घरे आ गइल। घरे आके फेरू झगड़ा कईलस। बाकिर अफसोस अकेलही चिलात रह गइल। ओकरा से कोई ना बोलल।

ओकर आशिक के रात के आठ बजे मोबाइल पर मैसेज आइल कि कब आवत बाड़ू। लइकिया कहलस कि सबुर करs अभी कोई सुतल नइखे। हम बारे बजे तक आ जाइम तहरा लगे। हमरा त इहवां अपने सांस फूलता।

लइकिया जोर से चिल्ला के कहलस कि हमरा के कोई परेशान ना करी। हम खाना आ लेले बानी आ केंवाड़ी बन कके सूते गइल। लइकवा धउर के आईल आ कहलस कि आलमारी से हमरा डायरी देद आ आपन सूत जा हम हारना ना करेम। चाभी बिछावना पर गोड़थारी रखले बानी।

लइकिया जान बुझ के सब सुनते अनसुना करत आपना मोबाइल पर जोर जोर से गाना बजावे लागल। उ बेचारा केंवाड़ी पिटत पिटत हार के चल गइल।

लइकवा के गइल के बाद उ आलमारी खोललस। आलमारी में लइकिया के एटीएम कार्ड, पासबुक आ सब गहना राखल रहे। साथे एगो कागज राखल रहे जवना पर ओह सब सामान के मालिकाना हक के दरसावल रहे। ई सब देख के ओकर आंख फाटल के फाटले रह गइल। तब तकले ओकर नजर डायरी पर पड़ल। डायरी लेके पढ़े लागल। लिखल रहे….
तोहर बाबुजी हमरा माई के एकदिन जान बचवले रहनी। ऊहो आपन खून देके। तबे हम ंहा से कहले रही कि इ एहसान हम कबो ना भूलाइब।

एकदिन के बात ह तहार बाबुजी हमरा घरे अइनी आ तोहर रिश्ता के बात कइनी आ तहरा बारे में सब साच साच बतवनी। तहरा पेयार के भी चरचा कइनी। तहर बाबुजी तहार खुशी चाहत रही। काहे से कि तू ऊहां के राजकुमारी रहलू। एह से उहाँ के तहरा खातिर एगो राजकुमार खोजत रही। तहार जवन आशिक रहे ओकर पहिलही बिआह हो चुकल रहे। इस बात अगर तहरा से कहती त तू ना मनतू। तहरा बिशवासो ना होईत। काहे से कि तहरा ऊपर इश्क़ के नशा चढ़ल रहे। प्रेम में हरमेशा बिरान आदमी आपन लागेला आ आपन आदमी बिरान।

एगो बाप के मुंह से आपना बेटी के कहानी सुन के हमू बिचलित हो गइल रहनी।

हम इहे सोचनी कि भले एगो आछा मरद पति ना बन सकेब त का ह एगो बेहतर दामाद त जरूरे बन के देखाइब। दहेज के मिलल रूपिया तहरा खाता पर रख देले बानी। मारूति चाभियो बा तहरा घरे भेज देहनी कि तहरा हमरा से जहिया मोहब्बत होई ओही दिन ओह कार से घूमे चलल जाई। दहेज़ से हमरा मतलब ना रहे एही से सब सामान तोहरे जिम्में बा।
हमरा बाबुजी के कहनाम रहे जे दहेज़ मत लीह।

कमरद हव भले कामा के खिअइह। अब तू आजाद बाड़ू। डायरी में एगो तलाक के कागज बा जवना पर हमरा साईन कइल बा। तू आपन साईन कर लीह। तू एह गंवार से पीछा छोड़ा के आपन सब सामान ले जा सकेलू। लइकिया हरान परेशान रहे….

ना चाहत गंवार के लिखल बात ओकरा दिल में उतरे लागल। ना चाहते ओह गंवार के पेयार बुझाए लागल। डायरी में आगे लिखल रहे कि हम तहरा के एह से मरनी ह कि तू माई के गारी देहलू ह। बेटा के सामने माई के बेइज्जती होखे आ बेटा देखत रहे तो उसे बेटा कइसन। हो सके तहरो बच्चा होई तू हूं माई बनबू त तोहरो सब बुझाई कि माई के पेयार आ दुलार का होला।

हम तोहरा के आपन हमसफ़र बनावे खातिर ले आइल रहनी। जबरदस्ती करेला ना। जब तहरा हमरा से पेयार हो जाई त भरपेट असूल लेम। तहरा से तहरा हर खींस के बदला हम पेयार से असूलब। अगर दोसरा के हो जईबू तो दुआ करब कि जहाँ रह सलामत रह।

लइकिया के एने मोबाइल बाजत रहे आ बाजते रह गइल। लइकिया अब उ गंवार के दुलहिन बन चुकल रहे। आंख के लोर टप टप चुवत रहे। सिसकत सिसकत मोबाइल खोलके सीम निकाल के तूड़ देहलस। जवन सामान जहाँ रहे रख देहलस। आ आराम से सुत गइल।

सबेरे जब आंख खुलल तबले ओकर गंवार दफ्तर चल गइल रहे। सबसे पहिले नहा धोआ के साड़ी पहिर के भर माँग सेनूर लगवलस आ फेर मंगलसूत्र।

आज गंवार के मेहरारू बन के सजत रहे। सज धज के रसोई में से जाके सास के लेआ के तईयार कके साथे इसकुटी पर बइठा के चल देहली आपना गंवार के दफ्तर। ओजा ओह लइकी के देख के लइकवा के अचरज भइल। साथे माई के देख के।

पुछलस माई सब ठीक बा नूं। माई के बोले से पहीले लइकिया लइकवा के भर अकवारी के धइ के कहलस कि अब सब ठीक बा।

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