दीपक तिवारी जी के लिखल भोजपुरी कहानी पेट

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पेट के खातिर लोग का,का ना करेला तबो ई पेट कबो भरेला ना ,रउवा सभ सुनले होखब की फलनवाँ चोरी करत में पकड़ा गइल बा, का शौख से चोरी करे गइल रहे,कबो सुने में आवेला की फलनवाँ फलनवाँ के जान से मार दिहलस ओकरा पीछे भी कवनो राज छुपल बा।

जवन की धीरे धीरे उजागर होला आज काल्हँ जवन समस्या बा सभका सोझाँ समान रूप से मुँह बवले खड़ा बा?

समस्या पेट के लेके शुरू होता,जवन ना कबो भरल आ ना कबो भरी ओहि सवाल के जवाब सभ के सभ जहाँ तहाँ ढूढ़ँ रहल बा।घर से प्रदेश ले आ देश से विदेश ले!

जीवन के कहानी के शुरुवात एहिजे से होता अगर जिये के बा त खाएँ के पड़ी फिर ओकर व्यवस्था भी कइल जरूरी होला।ओकरा खातिर मेहनत मजदूरी करही के पड़ी बिना कुछ कइले ठेकी कहाँ से!!

पेट के खातिर भोजन के जुगाड़ में ग्राम- रामपुर के,भगवान दास के लइका जिनकर नाँव भक्त लाल रहे कामाए खतिरा आपन देश छोड़ के विदेश (गल्फ)में गइल रहले।

गर्मी धूप में बिहने से लेके साँझ तक काम करस,फिर रहे वाला जगहि प आवस बनावस खास फिर सुतस आ भोरहि में उठ के रोज के तरे ओहि प्रक्रिया में लागल रहस।

बाप भगवान दास केहु लेखा खेतिवारी क के आपन त गुजारा क लिहले बाकी अपना लइका के भविष्य के लेके बहुत चिंतित रहस,ओहि के मध्य नजर अपना लइका के खूब पढ़वले लिखवले?

भक्त लाल के स्नातक के जब परिणाम निकल गइल तब भगवान दास बहुत खुँश भइले।

कहलहम त जवन कइनी तवन कइबे कइनी हमार लइका त ना करि।

भक्त लाल भी अब डिग्री लेके नौकरी खोजे लगले जहाँ तहाँ?
जब कहि भी भक्त लाल के नौकरी ना मिलल त हार पाछ के विदेश जाए के मन बना लिहले।

उनूका एगो सँघतिया के बाबूजी विदेश में रहत रहले उनही से बात चीत क के काम सिखावे वाला एगो प्रशिक्षण केंद्र में दाखिला लेबे खातिर इच्छुक अउर उतावला रहले,जहाँ काम सिखा के विदेश भेजे के काम एजेंट लोग के माध्यम से होत रहे।

जब नाँव लिखवावे बदे अपना बाबूजी से रुपिया भक्त लाल मंगले त उनुकर बाप जी भगवान दास देबे से मना क दिहले कहले कहि नइखे जाएँ के एहिजे कवनो छोट मोट काम धाम करs आँखि का सोझाँ रहs उनुकर माईओ मना कइली, बाकी केहु के एक ना मनले “भक्त लाल”के जिद्द के आगा सभे झुँक गइल।

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लाख समझवला के बाद भगवान दास कहले,तोहरा जवन मन करे करs जब बात ना मनबs त का केहु करि,रुपिया कहा अतना बा हमरा लगे कि तोहरा के विदेश भेजब सुनेनी की बड़ा रुपिया लागेला जाए में बाकी भक्त लाल एक सुने के तइयार ना होखस उनूका ऊपर त विदेश जाए के भूत सवार रहे।

भगवान दास का करस गाँव के एगो आदमी के आपन खेत बाँहे धके भक्त लाल के रुपिया दिहले नाँव लिखवावे खातिर

करीबन तीन चार महीना बितला के बाद भक्त लाल के बाहर जाए के मौका मिलल बहुत खुँश रहले मने,मन सोचस की हम बहुत सारा रुपिया कमा के अपना बाप माई के आएब त तिरिथ कराएब।

बहुत कष्ट उठवले बा लो हमरा पालन पोषण में पढावे लिखावे में आपन पेट काट के हमके खिवले बा लो खेत भी छोडावे के बा जवना रुपिया खेत पर लियाईल बा विदेश जाए ख़ातिरा बहुत सारा आस लेके विश्वास के साथ घर से चल दिहले।

दीपक तिवारी जी
दीपक तिवारी जी

बाकी उनूका बाप माई के तनिको नींक ना लागो उनुकर विदेश गइल,लेकिन भक्त लाल के रोक ना पावल लो आँख में बिछडला के लोर आ हृदय में पीड़ा लेके घर से विदा कइल लो, बता समझा के की विदेश में बढियाँ से रहल जाला झँगड़ा झँझट मार पीट ना कइल जाला सुनले बानी की ओइजा के सरकार बहुत चुस्त हउँए गलती कइला प तुरन्त सुनवाई होला एहि डरे केहु कवनो गलती ना करेला।

ना मनबs त जा बाकी आपन धेयान रखिहँ कवनो भी काम सोच विचार के करिहँ केहु का बहकावाँ में जनि अइहँ लोग तरह तरह के बात करेला ब्लगलावेला बहुत लोग, जा हमनिन के आशीर्वाद तोहरा संघे बा।

भक्त लाल एयरपोर्ट जाए खातिर घर से प्रस्थान कइले जहाँ से उनूका सऊदी जाए के रहे, ऐरोप्लेन के माध्यम से लेकिन ओकरा पहिले ट्रेन से उनूका मुम्बई जाए के रहे जल्दी जल्दी में टिकट बुक भी ना हो पावल त जनरले से जाए के परल ट्रेन में दिक्कत त भइल बाकी जवन सपना भक्त लाल सजवले रहले ओकरा आगे कुछ ना रहे।
उनुकर सपना अब साकार होत नजर आवत रहे।

मुम्बई छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से हवाई जहाज में बइठ के सऊदी चहुँप गइले,बहुत खुँश रहले उनूका खुँशी के कवनो अंत ना रहे!

काम भी लाग गइल मन लगा के करे लगले जवन भी कर्जा ओवाम भइल रहे सभ,कुछ दिन में कमा के भर दिहले।

छः महीना ले त सभ ठीक ठाक चलल बाकी एक दिन रातो रात कम्पनी देवाला घोषित हो गइल आ कम्पनी के बाहर गेट पर बड़का ताला लाग गइल।

कम्पनी के ओरी से जवन सुखल पाकल भोजन मिलत रहे,उहो अब बन्द हो गइल जवना पेट के लेके भक्त लाल गइल रहले विदेश में कामाए अब पेट के भरे में असमर्थ रहले करस त का करस!!

उनूका संघे अउर भी लोग रहे जे आपन आपन सपना लेके आइल रहे,घर से दूर लेकिन केहु का समझ मे ना आवे की का करे लो सभ के सभ परेशान आ बेहाल खाना पीना सभ बन्द हो गइल!!

कइसो दिन आ रात कटो केहु का लगे टिकट के पइसा ना रहे ना लगे केहु का पासपोर्ट रहे ना केहु ओइजा मददगार ही जे एह मुसीबत से निकाल सके।केहु भी अब माई बाप ना रहे खोज खबर लेबे वाला सभ सहायता के खातिर पुकारत रहे।

जब एने भक्त लाल के बाप माई के मालूम भइल की हमार लइका विदेश में जाके फँस गइल बा त छाती पिट पिट के रोए लागल लो,कहनी की विदेश मत जा कपार प विदेश के भूत सवार रहे? अब पर गइल नु कपारे हे भगवान कइसे एह मुसीबत से छुटकारा मिली,भगवान दास कहस आ रोवले जास।

कतना हाली माना कइनी की मत जा मत जा बाकी हमार केहु कहल सुने तब नु घर मे कई दिन ले चुल्हाँ ना जरल लइका विदेश में फँस गइल बा ई सुन के बहुत परेशान रहेलो।

करीबन महीने दिन बितला के बाद भारत सरकार के बदौलत सभे सही सलामत अपना अपना घरे आ गइल लो जवना में एगो भक्त लाल भी रहले उनूका वापस आ गइला से गाँव घर मे खुँशी के माहौल रहे।

काहे की भगवान दास के घर के बस उहे एगो चिराग रहले बुढ़वती के लाठी!! का,का बीतल कष्ट झेले के परल सभ विस्तार से वितान्त सुनवले,सुन के सभका आँख से लोर प्रवाहित होखे लागल केना विदेश में जाके लोग रुपिया कमाला कहि के रोए लगले।

आ कहस की केहु विदेश मत जा अपने देश में ही रहो तनि कमे कमा बाकी एहिजे रहो बहुत दुर्दशा बा देहिया के गजन ओहिजा? जब केहु उनसे पूछे का हो भक्त लाल अब विदेश ना जइबs रुपिया कामाए त भक्त लाल कहस!! एह गीत के माध्यम से।।

गीत

कs के मेहनत मजदूरी हम पेटवा जियाएब,
बाकी अब हम विदेश में कामाए ना जाएब।

इयाद आवे जब बहे अखियाँ से लोर,
उहे जाई विदेश जे पाप कइले होई घोर।
चाँहे रहब उपास तनि कमे हम खाएब…
बाकी अब हम विदेश में कामाए ना जाएब।

चैन नाही मिले तनिको रात चाँहे दिनवा,
सिहर जाला रोवा जब मन परे सिनवा।
तनि कष्टे में रहब दुःख में जिनगी बिताएब…
बाकी अब हम विदेश में कामाए ना जाएब।

सुनs मथवा में होखे रोज साँझी बेरा दरद,
आ बाहरा में गरमी लागे रूमवाँ में शरद।
कवनों काम क लेब तनिको ना सरमाएब…
बाकी अब हम विदेश में कामाए ना जाएब।

दीपक जर जाला पीठ गिरे देहियाँ से पानी,
सगरो माँटी में मिल जाला चढ़ली जवानी।
रहब घरवा दुआर रुपिया कमे हम पाएब…
बाकी अब हम विदेश में कामाए ना जाएब।

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