भोजपुरी कवि सम्मेलन : जय भोजपुरी जय भोजपुरिया

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भोजपुरी कवि सम्मेलन : जय भोजपुरी जय भोजपुरिया
भोजपुरी कवि सम्मेलन : जय भोजपुरी जय भोजपुरिया

“भोजपुरियन के ए भइया! का कहेलS?
सोझा आवS अखाड़ा लड़ा दिहें सन।
तोहरी चरखा पढ़वला में का धइल बा?
तोहके सगरे पहाड़ा पढ़ा दिहें सन।”
मोती बीए

#जय_भोजपुरी_जय_भोजपुरिया के हिन्दी भवन, नई दिल्ली में तारीख 28-07-2019 दिन अतवार के “भोजपुरी कविसम्मेलन” के आयोजन एगो मिसाल बनवलसि। हिम्मत होखे, श्री Suresh Kumar जी आ श्री Kanhaya Prasad Tiwari Rasik जी जइसन मार्गदर्शक संरक्षक होखे आ श्री Satish Kumar Tripathi जी जइसन डेग-डेग पर सब दिसाईं उत्साह बढ़ावेवाला अध्यक्ष होखे त ई परिवार कवनो जगह पर भव्य आयोजन करि सकता। मंच पर विराजमान भोजपुरी के बड़हन हस्ती, भोजपुरी के सर्वश्रेष्ठ तिमाही पत्रिका #पाती के सम्पादक श्री Ashok Dvivedi जी, प्रसिद्ध रंगकर्मी श्री Mahendra Prasad Singh जी, भोजपुरी साहित्य सरिता के सम्पादक श्री Jp Dwivedi जी, सर्वभाषा ट्रस्ट पत्रिका के सम्पादक श्री Keshav Mohan Pandey जी, श्रीमती Samta Sahay जी, श्रीमती कश्मीरा त्रिपाठी जी आ श्रीमती मुन्नी देवी जी एकर प्रमाण बा सब।

भोजपुरी कवि सम्मेलन : जय भोजपुरी जय भोजपुरिया
भोजपुरी कवि सम्मेलन : जय भोजपुरी जय भोजपुरिया

लव कान्त सिंह ‘लव’ जी का मँजल संचालन में लगभग चार घंटा ले चलल कविसम्मेलन में कवन रस ना बरिसल? साँच पूछीं त अमृत बरसल आ सभे अमृत पी के अघा गइल। परिवार के वरिष्ठ सवांग आ #सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका के उप सम्पादक तारकेश्वर राय जी अपना सहयोगी Ram Prakash आ Yogguru Shashi Prakash Tiwari का साथे कार्यक्रम के सुचारू सम्पन्न करावे में पूरा ऊर्जा लगा दिहनीं। दीया जरावल, स्वस्तिन वाचन, श्रीमती वीणा तिवारी जी की अगुआई में भोजपुरी क्षेत्र के हर मांगलिक कार्यक्रमन में सबसे पहिले गवाएवाला गीत “गाइ का गोबरे महादेव….” महिला लो का सामूहिक सुर में गायन आ अध्यक्षीय संबोधन का बाद शुरू भइल कविसम्मेलन रात 09-00 बजे ले अपनी चरम पर पहुँच के समाप्त भइल। समाप्त का भइल, कइल गइल। ए से कि कार्यक्रम स्थल ओतने समय खातिर बुक रहे।

ना त भरि रात कविसम्मेलन होइत तबो ना सुनावेवाला कम होइतें आ ना सुनेवाला ए रसगंगा में पँवरल छोड़ितें।
वरिष्ठ कवयित्री कश्मीरा त्रिपाठी का भोजपुरी काव्यपाठ से शुरू भइल कार्यक्रम श्रीमती समता सहाय जी के पारम्परिक लोकगीत “अँचरवा के हम…” पर जा के विराम लिहलसि। ए बीच में अमन पाण्डेय जी, आर जी श्याम जी, Rajeev Upadhyay जी, संजीव कुमार त्यागीजी, Guruvindra singh जी, Kundan Singh जी, विनय शुक्ल ‘विनम्र’ जी, लाल बिहारी लाल जी, Vinod Giri जी, डा. Rajesh Kumar Manjhi जी, Raj Kumar Anuragi जी, Munna Pathak जी, Pankaj Tiwari जी, Santosh Sharma जी आ कई दूसरो कवि आपन प्रतिनिधि कविता पाठ क के श्रोता लो का हिरदय में जगहि बनवलें आ अमिट छाप छोड़लें। मने, रस बरिसल त खूब बरसल। सभे सराबोर हो गइल। पैनाली दिलीप जी के एसपेशल कवितापाठ आ एसपेशल सक्रियता के बखान कइला मान के नइखे। सब कमी के छनभर में निदान करे में Sanjay Kumar Ojha जी निःसंदेह बधाई के पात्र आ हकदार बानीं। मार्गदर्शक सदस्य Bm Upadhyay जी हर डेग पर ठाढ़ मिलनीं। Rama Shankar Tiwary जी अपनी सक्रियता आ ऊर्जा से साबित कइनीं कि निःसंदेह बरियार सैनिक जइसन सेना में काम कइले बानीं।

अन्त में, सोझा भा अन्हे से, देश से भा बिदेस से कवनो तरे से कार्यक्रम से जुड़ल परिवार के सवांग आ सब भोजपुरिया भाई लो के आभार आ धन्यवाद। अगिला साल (2020 में) फिनु मिलल जाई दिल्ली में। जुलाई महीना का आखिरी अतवार के, परिवार के छठवाँ अस्थापना दिवस मनावे।

तब ले परिवार आनलाइन कजरी गायन प्रतियोगिता के कार्यक्रम बना रहल बा। आ हँ, 06 नवम्बर 2019 के अमहीं, गोपालगंज, बिहार में महाजुटान खातिर हमनीं का साथे रउरो लोग तइयारी करीं। ओकरा एक हप्ता पहिले “सिरिजन”के छठवाँ अंक रउरा पढ़ि लिहले रहबि।
“सनेह होखे त नाँव टाँकि लीं।
हिलोर उठे त मने मन आँकि लीं।
अलगा से देखे में धुधुराह लागे त
‘अंजन’ रचा के नियरा से झाँकि लीं।”

संगीत सुभाष,
मुसहरी, गोपालगंज।

रउवा खातिर:
भोजपुरी मुहावरा आउर कहाउत
देहाती गारी आ ओरहन
भोजपुरी शब्द के उल्टा अर्थ वाला शब्द
जानवर के नाम भोजपुरी में
भोजपुरी में चिरई चुरुंग के नाम

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सोहर

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