भोजपुरी कविता हम नारी आधार जगत के : आकृति विज्ञा ‘अर्पण’ जी

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आकृति विज्ञा 'अर्पण' जी
आकृति विज्ञा 'अर्पण' जी

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ना जानीले साज हे लोगवा
ना जानीं श्रृंगार जगत के
एतना बाकिर जानीलें कि
हम नारी आधार जगत के…

आकृति विज्ञा 'अर्पण' जी
आकृति विज्ञा ‘अर्पण’ जी

हाँ ,हम नारी आधार जगत के
दुनिया के गति हमरे से
हमरे आँसू से अवनति
जग के उन्नति हमरे से
पूजिके पाहन देवता कईलीं
हम आराध्या मरम भगत के…
हम नारी आधार जगत के….

हाँ, हम नारी आधार जगत के
हम सिया राम के शिव के शक्ति
कई रूप में नेह पुजारिन
राधा मीरा लखन के भक्ति
हमसे नर, नर से हम बानी
हम प्रकृति अवतार जगत के…

हम नारी आधार जगत के
हाँ हम नारी आधार जगत के
जब अंत समय अईहें कलियुग के
घड़ा पाप के भरि जईहें
संयम के सीमा लांघ पाप
पुण्य के पीछे पड़ि जईहें
तब बैष्णवी रूप में ब्याह रचाईब
हम करबें उद्धार जगत के
हम नारी आधार जगत के……

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