भोजपुरी साहित्य खातिर समर्पित इंजीनियर अब हमनी का बीच ना रहनी।

आजु सबेरे प्रो. ब्रजकिशोर जी (79 वर्षीय) के निधन हो गइल। उहाँ के कई दिन से बीमार चलत रही। आजु ब्रजभूषण मिश्र चाचा से बात कइला आ प्रो ब्रजकिशोर जी के बेटी बुलबुल से बात कइला पर जानकारी प्राप्त भइल ह। 10-15 दिन से उहाँ के पटना के एगो अस्पताल में जिंदगी के जंग लड़त रही, आज सबेरे आई सी यू में उहाँ के अंतिम साँस लिहनी ह।

प्रो. ब्रजकिशोर जी के जनम मकरसंक्रांति के दिना सन 1939 ई. में सिवान जिला के भगवानपुर हाट प्रखंड का माघर गांव के एगो साधारण गृहस्थ परिवार में भइल रहे। पढ़ाई लिखाई गाँव के प्राइमरी स्कूल, बसंतपुर मिडिल स्कूल आ हाई स्कूल, साइंस कॉलेज, पटना आ बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना में भइल रहे। 1964 में इहा के मेकैनिकल इंजीनियरिंग में बी टेक कइला के बाद बिहार सरकार के विज्ञान आ प्रावैधिकी विभाग के अंतर्गत पॉलिटेक्निक में सहायक प्राध्यापक का रूप में बिहार सेवा आयोग से नियुक्त भइल रही। 2002 के जनवरी में सेवानिवृत्त। 1965 में रूपश्री जी से विवाह बंधन में बंधल रही।

प्रो. ब्रजकिशोर जी
प्रो. ब्रजकिशोर जी

हिंदी-भोजपुरी में लड़ीकइये से लिखे के सुर चढ़ गइल रहे।सातवें क्लास से पत्र पत्रिकन में रचना छपत रहे। भोजपुरी, भोजपुरी कहानियाँ, अँजोर, योगी आदि में लगातार कविता, कहानी, निबन्ध के प्रकाशन होत रहे। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के गठन में शुरुये में जुड़ाव भइल। उहाँ के ‘भोजपुरी परिवार’ के सक्रिय सदस्य, ‘अँजोर’ के संपादक मंडल में शामिल रही। ‘धुँआ'(कहानी संग्रह),’जोत कुहासा के(छंदमुक्त कविता, गद्य गीत संग्रह), बूंद भर सावन(कविता संग्रह), ‘एक टुकी अन्हरिया'(भोजपुरी कहानी संग्रह 2009) भोजपुरी में प्रकाशित बाड़ी सन।

‘लहर के बोल(हास्य-व्यंग्य कहानी संग्रह), ‘सेसर कहानी भोजपुरी के, श्रीमंत, इकीसवीं सदी में भोजपुरी, डॉ विवेकी राय:व्यक्तित्व आ कृतित्व, अनिल कुमार आंजनेय:व्यक्तित्व आ कृतित्व, पराग के रचना संसार, कथाकार कृष्णानंद कृष्ण आदि एक दर्जन से ज्यादा भोजपुरी के पुस्तकन के संपादन भी कइनी।

कहां गये जांत और वो जंतसार गीत : एस डी ओझा

हिंदी, भोजपुरी, अंग्रेजी में शैक्षिक-धार्मिक साहित्य के डेढ़ सौ से भी ज्यादा किताब छप चुकल बाड़ी सन ।’अभिनव मातृशक्ति’, ‘योगिराज’ ,’भोजपुरी कथा कहानी’ के सफल सम्पादन आ प्रकाशन भी कइले रही।उहाँ के दूर दर्शन आ आकाशवाणी के पटना केंद्र से कहानी, कविता, वार्ता, परिचर्चा के प्रसारण बराबर होत रहे।

कहल जा सकेला भोजपुरी खातिर पूरा तरह से समर्पित व्यक्तित्व, संगठन, सम्पादन आ लेखन से भोजपुरी के एगो अलग पहचान दियावेवाला आ अबही वर्तमान में – ‘भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका’ के संपादक आ सम्मेलन के संचालक रहल प्रो ब्रजकिशोर जी के निधन से समस्त भोजपुरिया जगत मर्माहत बा।प्रो.ब्रजकिशोर जी के निधन से भोजपुरी जगत के बड़हन क्षति भइल बा। परमपिता परमेश्वर से इहे प्रार्थना बा कि दिवंगत आत्मा के शांति प्रदान करस। एह शोक के घड़ी में समस्त भोजपुरिया समाज के शोक आ संवेदना परिवार के साथे बा।

राजेश भोजपुरिया
राजेश भोजपुरिया

 

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