हेलमेट जन-धन के रक्षक बा

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हेलमेट जन-धन के रक्षक
हेलमेट जन-धन के रक्षक

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, रउवा सब के सोझा बा महादेव कुमार सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी हेलमेट जन-धन के रक्षक बा, पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा महादेव कुमार सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी ( Bhojpuri Kahani) कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि एह कहानी के शेयर जरूर करी।

दुपहिया गडी चलावे से पहिले रऊआ लोग रूकके सोची आऊर समझ ली कि रऊआ लगे हेलमेंट बा कि नईखे, ई बात हम एह खतिरा कहे चाहतानी कि एही पचीस अगस्त 2019 के एगो अईसन घटना घटित भईल कि लोगसब एकराके देखके घबरा गईलन। घटना से पहिले हमनियो नईखे जानत रही कि हजार पाँच सौ के हेलमेट न पहिने के कारण कई लाख चुकवला पर भी आदमी के जीवन बचवला असंभव होलाआपन देश के सड़क दुरघटना में नब्बे परतिशत से भी जादा मौत माथा में चोट लगे के वजह से होला। एही खतिरा रऊरा लोग से हम विनती करतानी कि रऊरा पीछे, रऊरा परिवार आऊर बालबच्चा बा, कमसे कम उनकरा खातिर हेलमेट पहनी आऊरो ओकरा बादे मोटर सईकिलया चलाई।

हेलमेट जन-धन के रक्षक
हेलमेट जन-धन के रक्षक

कहानी बलुअर गाँव बिहार से बा, जहँवा हमार शकुंतला बहन के सादगी, ईमानदारी आऊरो उदारता देखके के आस-पडोस आऊर गाँव-घर के लोग सब खुश रहे। जब कबो आपन बेटा संगे डाकटर-वैध चाहे कर कुटुम के ईहाँ आवत जात रहे त बेटा संगे बिना हेलमेट के चल देत रहलन।

गँउवाँ में अभीओ महिला लोगके बिना हेलमेटे के चले के आदत बा। जब बहिन जी आपन गाँव से थोडका आगे गईलन कि एकाएक मोटर सईकिलिया से फेंका गईलन आऊर बस मुँह से निकलल- “जा-जा हम गिर गईनी,, एतना कहला के बाद कोमा में चल गईलन। अब ओकरा बाद के जे कहानी बा, बङ दरदनाक बा। जब लोग सब मिलके ऊनकराके पराईवेट होसपीटल ले गईल तब आपरेशन मे केह पाँच लाख त केह सात लाख खरचा बतईलस आऊर कहलस कि आपरेशन के बाद भी ठीक होखेके गारंटी नईखे।

डाकटर खुलके कहलन कि शकुंतला बहन के शरीर के सब अंग काम करता बाकी माथा के भीतरी एतना भारी चोट बा कि इनकर सिर मृत समान हो गईल। एतना सुनला के बाद ऊहँवा खङा लोग सब एक दोसर के मुँह ताके लगलन आऊर तबे ऊनकराके ई समझ में आईल कि एगो अदना सा हेलमेट न पहिरे के कारण जन-धन के केतना बडका क्षति हो गईल ? चार-पाँचे दिन में लाखो रूपईया बरबाद हो गईल आऊर बहिनजी भी मर गईलन।

महादेव कुमार सिंह जी
महादेव कुमार सिंह जी

एह तरह से जन धन दूनो के अपार क्षति भईल तब सबके समझ आईल कि हेलमेट हमनी के जन धन के केतना रक्षा करेलाअब फेर से हम विनती करतानी कि रऊआ लोग भी गडी स्टार्ट करे से पहिले महिला सवारीके हेलमेंट पहना दी, ओकर बाद खुद हेलमेंट पहनी तबे आपन गडिया के चलावे के कोशिश करी। आदमी के जिनगी बङ अनमोल होला, ई धरती से एकबार परान छुटला के बाद दोबारा ई शरीरिया फेरू कबो वापिस नईखे लऊटत। आज पेंशनधारी शकुंतला बहन के पीछे जेतना बाल-बच्चा बा, सबके सब बेसहारा हो गईलेआज पढल-लिखल के छोङ दी, अनपढो लोग समझेलन कि बिना हेलमेट के गडी के सावारी कईला सीधा आत्म-हत्या के समान होला।

अब अंत मे फेर से आपन भोजपुरिया भाई-बहिन से नम्रता पूरबक निहोरा बा कि रऊआ लोग भी आजसे बिना हेलमेंट पहिरले आपन गडिया न चलाई, आऊर आपन बहुमूल्य शरीरके रक्षा करी, तबे न आपन भोजपुरिया प्रांत के विकास मे रऊआ लोग भरपूर योगदान देत रहब।

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