कल्पना से उड़ान ले : जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया

भाषायी बढ़ोतरी आ एह बदे जनचेतना जगावे के उद्देश्य से “जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” के गठन के जवन मकसद रहे, जमीन पर सच्चाई बनिके उतरि रहल बा। कल्पना ई रहे कि “कुछलोग त अइसन होखे जे भोजपुरी भाषा से लेनदेन की प्रवृत्ति के बिचार छोड़ि के भोजपुरी के नेह- छोह, प्रेम-दुलार, लोकबेहवार, हरख- बिखाद, शिष्टाचार, जीवट, ओज आ सांस्कृतिक संस्कार अपना जीवन का हर डेग पर उतारे के कोरसिस करो। मतलब, भोजपुरी का साथे जिअल- मुअल सब होखो। ई सपना सच्चाई बनत देखि के छाती एक-दू इंचि चाकर त होइए जाता। हमरा साथे पूरा भोजपुरी जगत ०६ नवम्बर, २०१९ के अमहीं मिसिर, छठियाँव बाजार, भोरे, गोपालगंज, बिहार में भोजपुरी जीएवालन के जुटान देखि के चकित बा।
चकित बा ए से कि एगो संरक्षक सुरेश कुमार जी मुम्बई से आ एगो संरक्षक कन्हैया प्रसाद तिवारी “रसिक” जी बंगलोर जइसन सुदूर जगहा बइठि के अपना परिवार के निर्देश देत बा सभ आ अमहीं में अध्यक्ष सतीश कुमार त्रिपाठी जी का नेतृत्व में “जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” के सवांगी आपन तनमन लगा के अविस्मरणीय आ ऐतिहासिक डँड़ीर खींचि देतारें, जवना का समानान्तर डँड़ीर खिंचल आसान ना होई।

०६ नवम्बर के ०१-०० बजे दिन में “जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” के अध्यक्ष सतीश कुमार त्रिपाठी (सपत्नीक) का साथे ज्वाला सिंह जी (छपरा), सुरेश पाठक जी (सुपुत्र- लक्ष्मण पाठक “प्रदीप” जी) आ अन्य उपस्थित गणमान्य सबका हाथ से दीया जरावते एगो ऐतिहासिक आ अनूठा कार्यक्रम के विधिवत श्रीगणेश भइल

“जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” अपना परिवार द्वारा हर साल देबेवाला ए साल के “अंजन सम्मान” आजमगढ़ के भोजपुरी के चर्चित आ सुकुमार सुरन के धनी कवि आ. भालचंद त्रिपाठी जी के आ “तिस्ता स्मृति सम्मान” सृष्टि शांडिल्य के दे के सम्मानित कइल। सम्मान में प्रशस्तिपत्र, अंगवस्त्र का साथे ₹ ५००१/- नगद दिआइल।

ओकरा बाद भोजपुरी के प्रतिष्ठित कवि सुभाष चन्द्र यादव जी की अध्यक्षता में कविसम्मेलन शुरू भइल। रउरा कल्पना करीं कि जवना कविसम्मेलन के संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि डा. अनिल चौबे जी करत होखीं, लगातार छव घंटा ले सुनेवाला बिना थकले सुनले होखे आ समाप्ति का बादो मलाल रहि गइल होखे कि तनी अउर भइल रहित, ओ कविसम्मेलन के स्तर केतना ँचा होई? अनिल चौबे जी का भोजपुरी बोले के आदत नइखे, लेकिन अपनी माईभाषा खातिर उहाँ के जज्बा देखत बनत रहे। मंच पर मजाक चलत रहे कि जे भुलाइयो के हिन्दी बोलि दी त दस रूपिया दंड देबे के परी। छव घंटा के भोजपुरी कविसम्मेलन अपने आप में एगो इतिहास बनल। मंच से आपन प्रतिनिधि भोजपुरी कविता सुनावे खातिर लगभग तीसन कवि के जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया परिवार का ओर से साधुवाद, धन्यवाद आ आभार।

कविसम्मेलन का मधे पधारल अति विशिष्ट अतिथि बिहार विश्वविद्यालय के भोजपुरी के विभागाध्यक्ष महोदय डा. जयकान्त सिंह जी “जय” के उद्बोधन उपस्थित तमाम भोजपुरिया का दिल आ दिमाग के सार्थक सोच से भरि गइल। उहाँ का निर्देश पर “जय भोजपुरी’-जय भोजपुरिया” परिवार भोजपुरी पुस्तकालय खातिर प्रयास शुरू क दिहले बा। सबकुछ सोचला अनुसार होई त बहुत जल्दी रउरा सबके एकर शुभदिन आ तारीख बतावल जाई। डा. जयकान्त सिंह जी के “जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” परिवार आभारी बा आ रउरा निर्देश में रचनात्मक काम क के आनन्दित होखे के एको मोका ना छोड़ी।

दूसरका सत्र के शुरुआत बक्सर से पधारल नन्दकुमार तिवारी जी (जे हर स्तर पर भोजपुरी के मान सम्मान के लड़ाई लड़े के जज्बा आ हौसला राखता आ जमीन पर लड़तो बा) का सम्मान आ उद्बोधन से शुरू भइल। राजन द्विवेदी के संगीत से सजल गीत-गवनई के कार्यक्रम के उद्घाटन “जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया” के अध्यक्ष सतीश कुमार त्रिपाठी जी फीता काटि के कइनीं। शशि अनारी जी का वन्दना गीत से शुरू भइल गीत- गवनई के कार्यक्रम में अभिषेक मिश्रा, शुभम् प्रताप सिंह, राधेश्याम जी, नीरज पाण्डेय, प्रीति कुशवाहा, श्रेयांश मिश्र, रवीश कुमार सानू, संजोली पाण्डेय आ मदन राय जी का साथे कब भोरहरिया के तीन बजे ले पहुँचि गइल, उपस्थित हजारों सुनेवाला ना समुझ पवलें। श्रोतासमाज पर जादू के असर पसरि गइल, सभे मंत्रमुग्ध हो गइल। कवनो कार्यक्रम के सफलता ओकरा समापन से आँकल जाला। सुननिहार के जीउ ना अघाय आ बेरि-बेरि कुछ अउर सुने के चाहत से भरल होखसु त बुझीं कि कार्यक्रम सुफल भइल। ठीक इहे हाल रहे। श्रोता का ना चाहते हुए कार्यक्रम बन्न करे परल।

बिदाई का बेरा सबके मन उदास हो गइल। लेकिन, ई सब लगातार त चलि नइखे सकत। रउरा सब एकदिन खातिर भोजपुरी जिअनीं, भोजपुरी नस-नस में बइठवनीं आ बँटनीं, एकरा खातिर अनघा धन्यवाद आ आभार। अब भोजपुरी के कर्जा चुकाईं आ अपना जीवन में भोजपुरी के सुभाव, भोजपुरी के मरम, भोजपुरी के संवेदना, भोजपुरी के सद्गुण नित उतारे के कोरसिस करीं। इहे ए परिवार के ध्येय बा आ अन्तिम लक्ष्य बा।

जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया कार्यक्रम के एगो झलकी

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