खदेरन के पाठशाला : जलोटा के लोटा में पेट्रोल के आग

खदेरन के पाठशाला : नवका मुद्दा
खदेरन के पाठशाला : नवका मुद्दा

(क्लास में लड़िका सब गाय लेखा चुपचाप बइठल बारें स, यूएसबी स्पीकर पर अनूप जलोटा के ग़ज़ल चल रहल बा। मास्टर साहेब के आवत मंगरुआ देख लेता, स्पीकर बन्द क के लुका देतारें स।)

मास्टर साहेब के परवेश-
(मास्टर साहेब क्लास में घुसते अकबका के क्लास से बहरी जाए लागत बारें तब लड़िका सब चाल करत बारें स)
मास्टर साहेब चिहा के ताकत बारे-
चिरकुट- काहे मास्सायेब, काहे भागल जात रहनी ह, जोर से लागल बा का!!
(ठहाका से क्लास गूंज जाता)
मास्टर साहेब- अबगे लगा जे हम तुम लोग के क्लास में आये हैं ना त तुम लोग चुप थे तो हम घबरा नू गए कि आही दादा हम कौनो दोसरा क्लास में नहीं नू घुस गए।

ढोंढ़ा- माने हमनी एतना लफंगा बानी स।

मास्टर साहब- पूछ रहे हो कि बात रहे हो, तुम सबको हम नीमन से जानते हैं।

लबेदा- मारसायेब हमरा गावे के मन करत बा।

मास्टर साहेब- बाक्क बेहुदा, अभी पढ़ने का समय है त तुम कहते हो गाना गाने का मन है, मन को सम्हारो नहीं त मन भर हुंकेंगे।

लबेदा- साँचो मारसायेब ,जोर से गावे के मन करत बा।

मास्टर साहेब- अनूप जलोटा का कहानी का बाहर आ गया कि अब सबको गाने का मन कर रहा है ,नहीं सुधरोगे का??

लबेदा- बहुते जोर से गावे के बा, ना त हम एहिजा गा देब।

खदेरन- मास्टर साहेब राउवे नू पिछला हफ्ता कहले रहीं की अब कोई पेसाब नहीं बोलेगा, गाना बोलेगा, उहे बोलता।

मास्टर साहेब- ओह, जाओ जल्दी भागो, जाके जगह पर गाओ (हँसत) हम भुला नू गए थे। अच्छा चलो आज जेनरल नालेज पढ़ाते हैं।

भूखल- ऐ मारसएब, मोदी के अइला के बाद पढाईयो में हमनी से भेदभाव होई, खाली जेनरल नालेज काहे दलित नालेज भी पढ़ाई ना त बाबू से जाके कह देब।

मास्टर साहेब- मायावती के पीतिआउत भाई बनोगे न त मारते-मारते पैंटे में गाना गवा देंगे। बोका कहीं का, जेनरल नालेज माने होता है सामान्य ज्ञान, जिसमें कर्रेंट अफेयर होता है, इतिहास, भूगोल, विज्ञान सबका थोड़ा बहुत जानकारी होता है। किसका बेटा है जी?

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भूखल- अपना बाबूजी के।

मास्टर साहेब- (दांत पीस के) सरकार मारने प मनाही नहीं करती नू त अभिये हम तुमको तुम्हारा बाबूजी का नाम रटवा देते। (लबेदा के परवेश)

मंगरु- सरजी एगो जेनरल नालेज के सवाल पूछीं का?

मास्टर साहेब- बाह मंगरु, बहुत बन्हिया, पूछो?

मंगरु – पेसाब करे के त गाना गावल कहे के बा त झाड़ा फिरे के का कहाई?

मास्टर साहेब- बईठो जल्दी नहीं तो एक्के सोटा में लोटा लेके नोटा दबाने लगोगे। इहे जेनरल नालेज पूछना था इनको, बकलोल कहीं का।

मंगरु – अच्छा बुझ गईनी।

मास्टर साहेब- तुम लोग के मारे हमको बीपी का दवाई खाना पड़ता है। शुगर अलगे बढ़ा हुआ है।

चिरकुट- शुगर कहाँ बढ़ल बा, 32-33 रुपे त मिलता छेदीया के दोकान प।

मास्टर साहेब- तुम्हरे बाबूजी न ँख का खेती करते हैं?

चिरकुट- हं मारसायेब, फेर महिया चाहीं का?

मास्टर साहेब- मारते मरते महिया बना देंगे तुमको, तुम्हरे बाबूजी के कारण हमको शुगर का बेमारी हो गया है।

चिरकुट- लs त एमे हमार बाबूजी का कs देहलें दादा।

मास्टर साहेब- जादा ँख बोते हैं जिससे जादा चीनी बनता है जिसके खाने से हमको शुगर हो गया है।

खदेरन- मारसाएब तब त हम अपना चाचा के माना कs देब की खेती छोड़ देस ना त रऊआ एगो आउर नया बेमारी हो जाई।

मास्टर साहेब- काथी का खेती करते हैं?

खदेरन – मारसाएब उ त मरचाई बोएले आ सूखा-सूखा के लाल मरचाई बेपारी से बेंचेले, उ खइला से रऊआ बवासीर हो सकेला।

मास्टर साहेब- बनोगे ढ़ेर होशियार, दिन भर घाम में खड़ा कर देंगे नू त मरीचा जईसा सुख जाओगे ,बुझे।।

खदेरन- बुझ गईनी।

मास्टर साहेब- अच्छा ढोंढ़ा बाबू बताओ कि पेट्रोल-डीजल का दाम काहे बढ़ रहा है।

ढ़ोंढ़ा- सरकार चाहत बिया की समाज से दहेज प्रथा खतम हो जाओ, पेट्रोल-डीजल महंगा रही त केहू दहेज में मोटरसाइकिल चाहे कार ना मांगी जवना से लड़की के बाप पर दहेज के बोझा कम हो जाई आ समाज मे बिकास होई।

मास्टर साहेब- बाह बहुत नाया सोच के समझदार बालक हो तुम। अब खदेरन तुम खड़ा होखो आ बोलो पेट्रिल-डीजल का दाम काहे बढ़ रहा है? जवाब नहीं बताते हो त आजे सब होशियारी झाड़ते हैं हम तुम्हारा।

खदेरन – दुनिया के बचावे खातिर

मास्टर साहेब – ई कईसे!!

खदेरन- देखीं मारसाएब, पेट्रोल-डीजल महंगा रही त गाड़ी सब ना चलिहें स, आ जब ई ना चलिहें स त परदूसन ना होई आ जब परदूसन ना होई त पर्यावरण ना बिगड़ी आ जब पर्यावरण ना बिगड़ी त दुनिया के सर्वनाश ना होई।

दोसर पॉइंट बा कि जब ई दुनु महंगा रही त आदमी पैदल चली आ जब आदमी पैदल चली त स्वस्थ रही। समाज स्वस्थ रही त बेमारी स लोग के मौत ना होई आ जब मौत ना होई त दुनिया बचल रही।

मास्टर साहेब- बस बस बहुत हो गया, ई तनी ढेर हो गया …कौनो सरकारी अफसर सुन लिया त हमरा नोकरिये खा जायेगा..(खदेरन हँसता) दांत मत चियारो नहीं त मारते मारते धुरछक छोड़ा देंगे। बईठ के पढ़ो हम खईनी खा के आ रहे हैं।

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– लव कांत सिंह ‘लव’

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