राम प्रकाश तिवारी जी के लिखल पाकिस्तान नाहीं बदली

राम प्रकाश तिवारी 'ठेठबिहारी'
राम प्रकाश तिवारी 'ठेठबिहारी'

सुरुज उगीहें पछिम से
चाहे चंद्रमा दिन में निकली
चाहे गंगा बहीएं उल्टा
आ चाहे धरती आपन धूरी बदली,
सब केहु बदली बाकिर
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाहीं बदली

कतनो पियइबऽ सांप के तु दुध
काटल नाही भुली
चोर चोरावल भुली,
बाकिर उ हथियावल नाही भुली
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाही बदली

अनकर हक के आपन कहल नाही भुली
आन घर में बम फोड़ल नाहीं भुली
मऊगई के अपना
बहादुरी कहल नाही भुली
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाहीं बदली

निर्दोषन के मरवावल नाही भुली
धर्म के आड़ा कुकर्म के
जेहाद कहल नाही भुली
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाहीं बदली

कबो कश्मीर त कबो पंजाब में
कबो बनारस आ गुजरात में
कहीयो बंगलुरू त कहीयो अहमदाबाद में
जयपुर आ अब दिल्ली में
धमाका कइल ना भुली
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाहीं बदली

भारत के बचवो जब बोली
ओकरा लागी उ बाघ के बोली
तबे त कही ले हम की
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाहीं बदली

देखे के बा हमनीं के धिरजा के
इ कहीया ले परीक्षा ली,
कहीया देश के नेतवन के आंख खुली
कहीया अपना करनी के फल एकरा मिली
चाहे कुछो हो जाव
पाकिस्तान नाही बदली
हो पाकिस्तान नाहीं बदली

राम प्रकाश तिवारी ‘ठेठबिहारी’

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