विद्या शंकर विद्यार्थी जी के लिखल भोजपुरी गजल

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सईंया सुधिया ना लिहले बिसार दिहले हो
तम दिहले दीया के ना उजियार दिहले हो

बंहिया धइले डगरिया में संगे हम चलब
बाकि कँटवा रहिया में उतार दिहले हो

हलुक हलुक दरदिया में जी लिहतीं हम
हँस के जखम परोसले बरियार दिहले हो

लहंगा लहंगा के मोती दमके दम दम
गोटा सगरी चुनरिया किनार दिहले हो

चोट जाला ना कबहूँ के ओराला दरद
पुरवइया से कह के कबार दिहले हो ।

बाबा खेतवा पोखरा खनाला

बाबा खेतवा पोखरा खनाला भइया बान्हस पींड़ हो
एही पोखरा बहिनिया नेहइहें नाया बसइहें नीड़ हो

खोलल कपड़ा धोबिया धोइहें मामी पोइहें सील हो
सुंदर भउजी अबटन लगइहें ननदी बाड़ी सुशील हो

विद्या शंकर विद्यार्थी जी
विद्या शंकर विद्यार्थी जी

पतिया लेइके बरिया जइहें मलिया लइहें फूल हो
गाँवे कपिया छुटी कलमिया छुटी जइहें इसकूल हो

कइसन होला माई ममतवा कइसन होला नेह हो
कइसन होला नैना के निरवा नैना लउके सदेह हो ।

अगिला जनमवा मांगब भइया

अगिला जनमवा मांगब भइया डोलिया चढ़ा दिहऽ हो
फेरिहऽ ना डोलिया कँहरिया तूँ निरवा बहा दिहऽ हो

तोहरे अँगनवा के बनब हम बबुनिया
खेल खेल में समझब सुपुली मउनिया
धरिहऽ जन ओईंछल हरदिया, हरदिया चढ़ा दिहऽ हो।

रोपेआ के लोभिया के अगहूँ ना भखिहऽ
भले ना कुआरी तूँ बहिनिया के रखिहऽ
रखिहऽ निरछर ना बहिनिया बहिनिया पढ़ा दिहऽ हो।

हर साल सवनवा में ससुरवा से आइब
दाल रोटी तोहरा हो सरधवा से खाइब
सलिया में हमरा कसिदवा कहब तऽ कढा़ दिहऽ हो।

बेटी के जतिया के बिया ना ओराइब
लिहले नयनवा सिसिकिया ना जाइब
मोरा नामे अँगना जमुनिया ना पेड़वा लगा दिहऽ हो।

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